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जानिये नरेन्द्र मोदी के खिलाफ तेज बहादुर यादव का नामांकन क्यों हुआ खारिज, ये है वजह

जानिये नरेन्द्र मोदी के खिलाफ तेज बहादुर यादव का नामांकन क्यों हुआ खारिज, ये है वजह
2014 के लोकसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल की तर्ज पर 2019 के लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी को टक्कर देने आए समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी बीएसएफ से बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव का एक नामांकन चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है। तेज बहादुर यादव ने नामांकन के आखिरी दिन सपा प्रत्याशी बनाए जाने के दौरान भी इस बात की चर्चा की थी कि उनका नामांकन खारिज भी हो सकता है। इसी लिये सपा की पूर्व प्रत्याशी शालिनी यादव ने भी निर्दल ही नामांकन कर दिया था। हालांकि तेज बहादु यादव भी इसके पहले अपना निर्दलीय नामांकन कर चुके थे। अब प्रशासन ने उनका एक नामांकन खारिज कर दिया है, जबकि दूसरे पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
सवाल यह उठता है कि तेज बहादुर यादव का नामांकन आखिरकार खारिज क्यों हुआ। हम आपको बताते हैं इसके पीछे की सच्चाई। यह बात सच है कि तेज बहादुर यादव का नामांकन खारिज कर दिया गया है। पर समाजवादी पार्टी के टिकट पर किया गया उनका नामांकन खारिज नहीं हुआ है। उन्होंने पहले जो निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा था उसे चुनाव आयोग ने निरस्त कर दिया है। उस नामांकन में प्रस्तावकों के नाम में गड़बड़ी की बात कही गयी है। हालांकि उनके सपा के टिकट पर किये नामांकन पर भी खतरा है।
सोमवार को नामांकन के अंतिम दिन समय खत्म होने के मिनट भर पहले समाजवादी पार्टी के टिकट पर तेज बहादुर यादव ने जो नामांकन किया उस पर भी आयोग ने आपत्ति लगा दी है। यह आपत्ति पर्यवेक्षक स्तर पर लगायी गयी है। हालांकि आपत्ति पर सफाई देने के लिये तेज बहादुर यादव को बुधवार को सुबह 11 बजे तक की मोहलत दी गयी है। तब तक तेज बहादुर को आपत्ति का जवाब देकर चुनाव आयोग को संतुष्ट करना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो उनके उस नामांकन पर आयोग कोई बड़ा फैसला ले सकता है।
सपा प्रवक्ता और तेज बहादुर यादव के चुनाव एजेंट बने मनोज राय धूपचंडी के मुताबिक निर्वाचन आयोग के पर्यवेक्षक ने तेज बहादुर को भष्टाचार के आरोप में बर्खास्त करार देकर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट देने को कहा है। राय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह बात पहले बताया जाना चाहिये था। तेज बहादुर ने दो दिन नामांकन किया, पर ये बात नहीं बतायी गयी। उनका आरोप है कि यह सब भाजपा के इशारे पर हो रहा है। वह नहीं चाहती कि नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कोई मजबूत प्रत्याशी मैदान में आए

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