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इस दिग्गज चाणक्य ने कर दी बड़ी भविष्यवाणी, इतनी सीट जीतेंगे अखिलेश और मायावती

इस दिग्गज चाणक्य ने कर दी बड़ी भविष्यवाणी, इतनी सीट जीतेंगे अखिलेश और मायावती
 24 साल के बाद मुलायम सिंह यादव और मायावती के एकसाथ मंच पर आने से यूपी के सभी समीकरण सपा-बसपा के गठबंधन की तरफ मुड़ गए हैं। लोकसभा चुनाव में जनता भाजपा के बजाए गठबंधन के पक्ष में मतदान कर रही है। 23 मई को जब नतीजे आएंगे तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बजाए कोई दूसरा नेता देश का प्रधानमंत्री बनेंगा। हमारे पास 78 में से 75 सीटें होगी, जब कि भाजपा एक या दो सीटों पर सिमट जाएगी। ये बात पत्रिका के साथ खास बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी के चाणक्य व प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने कही।
75 प्लस सीटें जीतेगा गठबंधन 
नरेश उत्तम ने कहा कि जनता ने जुमलेबाजों के बजाए जमीन से जुड़े नेताओं के पक्ष में मतदान कर रही है। प्रदेश में गठबंधन का प्रदर्शन ऐसा होगा कि राजनीति के पंडित भी हैरान रह जाएंगे। इस बार भाजपा प्रदेश में एक-दो सीटों के लिए भी तरस जाएगी। लोकसभा चुनाव को देश की राजनीति के लिए निर्णायक ठहराते हुए सपा नेता ने कहा कि प्रदेश के मतदाताओं पर अबकी बड़ी जिम्मेदारी है। अखिलेश और मायावती हर हाल में देश से संप्रदायिक ताकतों को हटाने के लिए युद्ध छेड़े थे। मायावती और मुलायम सिंह ने जिस तरह से मैनपुरी में एकसाथ लोगों को संबोधित किया, उससे यूपी में लहर सुनामी में तब्दील हो गई है।
10 में 10 सीटों पर जीतेगा गठबंधन
नरेश उत्तम ने बताया कि कानपुर जोन की नगर, देहात, फर्रूखाबाद, कन्नौज और इटावा के अलावा बंुदेलखंड की बांदा, हमीरपुर, जालौन, झांसी और फतेहपुर की सीट पर गठबंधन की जीत तय है। नरेश उत्तम बताते हैं, हम पिछले पांच माह से इन जिलों का दौरा कर रहे हैं। गांव में ग्रामीणों के बीच जाने के बाद भाजपा सरकार के कार्यकाल की ठीक से तस्वीर दिखती है। किसानों के खेत पूरी तरह से उजड़ चुके हैं। अन्ना मवेशी आज भी उनके पेट से निवाले को अपने पैरों से रौंद रहे हैं। जनता वोट की चोट की इंतजार कर रही है।
कार्यकर्ताओं का टेम्पों हाई
बसपा सुप्रीमो मायावती और मुलायम सिंह के मंच साझा करने के बारे में नरेश उत्तम ने कहा कि बहन जी और नेता जी को एक मंच पर आने से दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। दोनों दलों के कार्यकर्ता अब एक साथ हैं। अब वोट बरसेगा, और गठबंधन की प्रचंड जीत होगी। नरेश उत्तम ने बताया कि जब हमारी उम्र महज 24 साल की थी, जब हम समाजवादी पार्टी के छोटे से कार्यकर्ता के रूप में आए। नेता जी के बजाए रास्ते पर चले। कांशीराम और मुलायम सिंह ले जब एक साथ चुनाव में उतरे तो हमें पहली बार विधानसभा में जाने का मौका मिला।

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