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अमेरिका की धमकी पर हिंदुस्तान ने दिया यह जवाब, सूची से किया बाहर

अमेरिका की धमकी पर हिंदुस्तान ने दिया यह जवाब, सूची से किया बाहर
ट्रंप प्रशासन के इस निर्णय पर वाणिज्यिक सचिव अनूप वाधवान का कहना है कि जीएसपी के फायदा अपेक्षाकृत कम थे.हिंदुस्तानगवर्नमेंट को हमारे विकास व लोक कल्याणकारी हितों के प्रति सचेत रहना होगा. हमारी प्रयास है कि जनकल्याण से समझौता किए बिना चिकित्सा उपकरणों की सस्ती कीमतों को संतुलित बनाकर रखा जाए. हमारे अमेरिका से बहुत गहरे संबंध हैं.
उन्होंने कहा, ‘जीएसपी के लाभार्थी की उपाधि वापस लेने से हिंदुस्तान के अमेरिका में निर्यात पर कोई जरूरीअसर नहीं पड़ेगा.हिंदुस्तान जीएसपी के तहत कच्चे माल व ऐसे सामान का निर्यात करता है जो अमेरिका के लिए फायदेमंद है. व्यापार से संबंधी सभी मुद्दों पर वार्ता की जा रही है. हम चिकित्सा उपकरणों की सामर्थ्य से कोई समझौता नहीं करेंगे.‘
वाधवान ने कहा, ‘अमेरिका 60 दिनों के अंदर जीएसपी को समाप्त कर देगा. अमेरिका के साथ हमारे संबंध मजबूत बने रहेंगे व हम उससे वार्ता करेंगे. हमारा आंकलन है कि इससे अमेरिका के 40 हजार करोड़ रुपये के निर्यात पर कोई जरूरीअसर नहीं पड़ेगा.‘
क्या है जीएसपी कार्यक्रम

जाएसपी सूची में शामिल राष्ट्रों के हजारों उत्पादों को अमेरिका में कर-मुक्त छूट की अनुमति देकर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए लाया गया था. ट्रंप का कहना है कि उन्होंने ये निर्णय इसलिए लिया है क्योंकि उन्हें हिंदुस्तान से ये आश्वासन नहीं मिल पाया है कि वह अपने मार्केट में अमेरिकी उत्पादों को बराबर की छूट देगा. उनका कहना है कि हिंदुस्तान में पाबंदियों की वजह से उसे व्यापारिक नुकसान हो रहा है.हिंदुस्तान जीएसपी के मापदंड पूरे करने में नाकाम रहा है. बीते वर्ष अमेरिका ने अप्रैल में जीएसपी के लिए तय शर्तों की समीक्षा प्रारम्भ की थी.

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