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Exclusive: बच्चों का मानसिक विकास रोक रहा क्लास में लगा AC

Exclusive: बच्चों का मानसिक विकास रोक रहा क्लास में लगा AC


अगर आपका बच्चा स्कूल के एयर कंडीशनर क्लास रूम में पढ़ाई कर रहा है तो सावधान हो जाइए। क्योंकि एसी क्लास रूम बच्चों के मानसिक विकास में बाधक हैं। डिजाइन एप्लीकेशन ऑफ होम इकोनॉमिक्स व भारतीय प्रदूषण नियंत्रण एसोसिएशन के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।

अध्ययन के अनुसार, एसी क्लास रूमों में प्रभावी वेंटिलेशन की व्यवस्था ना होने के कारण औसतन 2000 पीपीएम तक कार्बनडाई ऑक्साइड का उत्सर्जन पाया गया है। वहीं पूरी तरह से बंद कमरों में कार्बनडाई ऑक्साइड का स्तर 5000 पीपीएम तक दर्ज किया गया है, जिससे क्लास रूम के अंदर छात्रों को सुस्ती आना, नींद आने की समस्या समेत उनका प्रदर्शन भी प्रभावित हो रहा है।

जुलाई 2016 से फरवरी 2017 के बीच हुए इस अध्ययन की रिपोर्ट को एक व दो फरवरी 2019 को दिल्ली में आयोजित पहली इंडोर इनवायरमेंट क्वॉलिटी एशिया कांफ्रेस में जारी किया गया है। भारतीय प्रदूषण नियंत्रण एसोसिएशन की उपनिदेशक व अध्ययन में शामिल राधा गोयल के अनुसार, अध्ययन में पाया गया है कि एसी क्लास रूम को बाहर से आने वाली ऑक्सीजन की मात्रा बेहद ही सीमित होती है, जबकि खिड़की व दरवाजे बंद किए रखे जाने की वजह से वहां कार्बनडाई ऑक्साइड की मात्रा में बढ़ोतरी होती है। वहीं अध्ययन में यही भी सामने आया है कि क्लास रूम में लगे एक्जास्ट फैन कार्बनडाईऑक्साइड को कम करने में कारगर है, लेकिन उसका प्रयोग नहीं किया जाता है।

738 छात्रों के बीच हुआ अध्ययन
दिल्ली के चार निजी स्कूलों के 738 छात्रों के बीच हुए अध्ययन के बाद यह नतीजे सामने आए हैं। इसके तहत जुलाई से अक्तूबर व नवंबर से फरवरी के बीच छात्रों का अलग-अलग प्रतिदिन लगभग 7 घंटे तक अध्ययन किया गया।

भारतीय प्रदूषण नियंत्रण एसोसिएशन के उपनिदेशक राधा गोयल ने बताया कि बाहर प्रदूषण का स्तर अधिक होने के कारण एसी के प्रयोग का प्रचलन बढ़ा है। इसके तहत तापमान को नियंत्रित करने के लिए कमरों की खिड़की व दरवाजे बंद करना जरूरी हो जाता है। ऐसी स्थिति में बाहर की ताजा हवा अंदर नहीं आ पाती है और कार्बनडाई आक्साइ का अधिक मात्रा में उत्सर्जन होता है।

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