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बसंत पंचमी के दिन करें ये उपाय, बच्चे हो जाऐेंगे शार्प माइंडेड

बसंत पंचमी के दिन करें ये उपाय, बच्चे हो जाऐेंगे शार्प माइंडेड
माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को सरस्वती की पूजा के दिन रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन को बसंत पंचमी पर्व कहा जाता है। इस बार बसंत पंचमी 10 फरवरी को मनाया जाएगा। बसंत पंचमी के दिन विद्यार्थी, संगीतकार और लेखक विशेष रुप से देवी सरस्वती की पूजा करते हैं और इनके अलावा भी लोग अपने घरों में भी सरस्वती जी की पूजा-अर्चना करते हैं। मां सरस्वती को वाणी, स्वर और विद्या की देवी कहा जाता है। इस दिन नन्हे बच्चों को अक्षर अभ्यास कराया जाता है, माना जाता है की इस दिन अक्षर अभ्यास करवाने से बच्चों की बुद्धि कुशाग्र होती है। मां सरस्वती जी का आशीर्वाद उन्हें मिलता है। प्राचीन काल में बालकों को बसंत पंचमी के दिन से ही शिक्षा देना शुरु किया जाता था, इसलिए इस दिन का महत्व विद्या व ज्ञान के क्षेत्र में अधिक माना जाता है। आइए जानते हैं क्या है बसंत पंचमी की अन्य मान्यताएं....

1. बसंत पंचमी के दिन बच्चों से काले रंग की पट्टी व चाक का पूजन करवाएं। बहुत छोटे बच्चों से चावल से भरी थाली पर अंगुली से इन 3 में से कोई एक अक्षर लिखवाएं। इस दिन सरस्वती स्वरूपा कलम व पुस्तक का पूजन करना चाहिए। इसके बाद सरस्वती के मूल मंत्र श्री ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा से देवी का पूजन व स्मरण करें। इसके साथ ही जो लोग अपने बच्चे को उच्च शिक्षा में सफल होता देखना चाहते हैं, वे पंचमी वाले दिन बच्चे के हाथ से किसी ब्राह्मण को वेदशास्त्र का दान करवाएं।

2. बसंत पंचमी के दिन 6 माह तक के बच्चों को पहली बार अन्न चखाने की भी परंपरा निभाई जाती है। इसमें बच्चे को पहली बार अन्न खिलाया जाता है, जिसे अन्न प्राशन संस्कार कहा जाता है। इस दिन दूध पीते बच्चे को नए कपड़े पहनाकर, चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर और उस पर बच्चे को बैठाकर मां सरस्वती की आराधना करके चांदी के चम्मच से खीर खिलाएं। बच्चे की जीभ पर ऐं, श्री या ॐ लिखें। वसंत पंचमी पर छोटे बच्चों को अक्षर अभ्यास करवाने से वह कुशाग्र बुद्धि का होता है। इस दिन माता-पिता अपने बच्चे को गोद में लेकर चांदी या अनार की कलम से शहद से बच्चे की जीभ पर ऐं, श्री या ॐ लिखें। इसके बाद सरस्वती का पूजन करें।

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